आसमान की
बुलंदियों को छूने वाले तूफ़ानी तेज़ गेंदबाज शोएब अख्तर ने क्रिकेट करियर के दौरान
बुरे दिन भी देखे हैं। शोएब के करियर में एक ऐसा भी लम्हा आया, जब उन्हें लगा कि अब
सबकुछ ख़त्म। क्रिकेट बिरादरी में तेज गेंदबाजी का डंका बजाने के बाद मिली शोहरत
और पहचान अब सिर्फ इतिहास बनकर रह जाएगी और प्रशंसक बुरी वजहों की वजह से याद
करेंगे।
शोएब पर पड़ी बुरे दौर की परछाई
साल 1999
विश्व कप में अपने नाम का डंका बजाने के बाद शोएब अख्तर पाकिस्तान क्रिकेट टीम के
साथ ऑस्ट्रेलिया के टूर पर गये थे, जहां हरतरफ इस तेज गेंदबाज की चर्चा हो रही थी।
क्रिकेट प्रशंसकों की जुबां पर एक ही नाम था – रावलपिंडी एक्सप्रेस।
ऑस्ट्रेलिया
के ख़िलाफ़ ब्रिसबेन और होबार्ट में दो टेस्ट मैच खेलने के बाद अगला टेस्ट मैच
पर्थ में था, जहां तूफ़ानी गेंदबाज शोएब अख्तर को लेकर एक नया बखेड़ा खड़ा हो गया।
अंपायर डेरल हेयर और पीटर विली ने रावलपिंडी एक्सप्रेस के बॉलिंग एक्शन पर सवालिया
निशान खड़े कर दिए और तो और मैच रेफरी जॉन रीड ने भी हामी भर दी। आईसीसी में भी
मामला दर्ज हो गया। इसतरह शोएब अख्तर के करियर पर घने काले बादल मंडराने लगे।
संदिग्ध बॉलिंग एक्शन का आरोप
टेस्ट
सीरीज ख़त्म होने के कुछ दिन बाद एकबार फिर पाकिस्तान टीम वापस ट्राई नेशन सीरीज
खेलने के लिए पर्थ पहुंची, जहां पहले से ही एक और मुसीबत रावलपिंडी एक्सप्रेस का
इंतजार कर रही थी।
पहले
वॉर्म अप मैच के दौरान ICC और PCB के मध्य टेलीकांफ्रेंसिंग हुई, जिसके बाद
संदिग्ध बॉलिंग एक्शन को लेकर शोएब अख्तर पर बैन लगा दिया गया। आईसीसी के इस फैसले
से शोएब के साथ-साथ क्रिकेट प्रशंसक भी हैरान रह गये।
रावलपिंडी
एक्सप्रेस पर बैन लगने के बाद पीसीबी चेयरमैन जनरल तौकिर जिया का कॉल आया और
उन्होंने पर्थ में ही शोएब को अगले कॉल का इंतजार करने का हुक्म दिया। उस वक्त
पूरी पाकिस्तान टीम शोएब अख्तर को होटल रूम में छोड़कर अगले मैच के लिए एडिलेड
रवाना हो गयी।
सात दिन तक कमरे में बंद रहे शोएब
आईसीसी
के बैन लगाए जाने के बाद शोएब अख्तर सदमे आ गये और फिर ख़ुद को सात दिन और रात के
लिए कमरे में बंद कर लिया। यही नहीं, करियर पर मंडरा रहे काले बादल को देख
रावलपिंडी एक्सप्रेस ने इंग्लैंड में दोस्तों को कॉल किया और क्रिकेट से इतर नई
नौकरी तलाशने की बातें करने लगे।
नज़र आयी एक उम्मीद की किरण
आईसीसी
द्वारा बैन लगाए जाने के बाद शोएब अख्तर ने वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया यूनिवर्सिटी के
बायोमैकेनिक्स डिपार्टमेंट का रूख किया, जहां डेरल फोस्टर की अगुवाई में एक टीम ने
रावलपिंडी एक्सप्रेस के बॉलिंग एक्शन का अध्ययन किया और फिर जन्मजात और लाइलाज कोहनी
की समस्याओं पर गौर किया।





Well written article
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