एक ऐसा क्रिकेटर, जो
‘ऑन द फील्ड’ और ‘ऑफ द फील्ड’ अपनी कातिलाना
मुस्कान से क्रिकेट प्रेमियों को दीवाना बना देता था. एक ऐसा क्रिकेटर, जिसे देखते
ही दर्शक जोर-जोर से गाने लगते थे. जी हां, हम बात कर रहे हैं भारत के पूर्व
क्रिकेटर लक्ष्मीपति बालाजी की, जिन्होंने अपने छोटे से करियर में वर्ल्ड क्रिकेट
पर गहरी छाप छोड़ी थी.
फिटनेस और चोट की वजह से मात्र 34 साल की उम्र में ही
क्रिकेटिंग करियर को बाय-बाय कहने वाले बालाजी इंटरनेशनल क्रिकेट जितना भी खेले, शान
से खेले और अपने खेल कौशल से टीम इंडिया के खिलाड़ियों के
साथ-साथ विपक्षी टीमों के मन में भी गहरी छाप छोड़ी.
...जब बालाजी हुए थे किडनैप
लक्ष्मीपति बालाजी के बारे में एक किस्सा काफी मशहूर है कि मात्र
13 साल की उम्र में इस क्रिकेटर को कुछ लोगों ने किडनैप कर लिया था, जिसकी वजह से
घर में और मोहल्ले में काफी तहलका मच गया था. परिजन अनहोनी की आशंका से परेशान हो
गये थे.
दरअसल, उनके शहर में
दो क्रिकेट क्लब का काफी वर्चस्व था. दोनों टीमों के बीच जीत-हार को लेकर काफी
रस्साकशी होती थी. एक क्लब का बालाजी भी प्रतिनिधित्व करते थे. बचपन से आला दर्जे
का क्रिकेटर होने की वजह से विरोधी टीम में बालाजी का खौफ़ रहता था.
विरोधी टीम उनकी स्विंग गेंदबाजी से थर-थर कांपती थी. ऐसे में एक टूर्नामेंट के
दौरान दोनों विरोधी टीमें फ़ाइनल में पहुंच गयी. फिर क्या था, विरोधी टीम के
खिलाड़ियों ने मुक़ाबले से पूर्व तय किया कि स्विंग बॉलर का अपहरण कर लिया
जाए.
हुआ भी ऐसा ही. मैच
के पूर्व 13 वर्षीय स्विंग गेंदबाज लक्ष्मीपति बालाजी का प्रतिद्वंदी टीम ने
किडनैप कर लिया और फिर एक बड़े से कमरे में ले जाकर बांध दिया.
विरोधी टीम के
प्लेयर्स ने चाकू लेकर धमकाते हुए कहा कि इसी
उंगली से तू गेंद स्विंग कराता है न, आज इसे हम काट देंगे ताकि तू कभी बॉल को
स्विंग न करा सके लेकिन बालाजी उनके आगे मिन्नतें करने लगे और कहा कि इसी उंगली से
तो मैं लिखता भी हूं, दूसरे काम भी करता हूं लिहाजा मुझे छोड़ दो. मैं गेंदबाजी
नहीं करुंगा.
बालाजी द्वारा लगातार
मिन्नतें करने के बाद किडनैपर्स ने रहम किया और फिर कोई हानि नहीं पहुंचायी और फ़ाइनल
मैच ख़त्म होने के बाद रिहा कर दिया. कातिल मुस्कान वाले इस क्रिकेटर की किडनैपिंग
का असर ये हुआ कि फ़ाइनल मुक़ाबले में बग़ैर बालाजी के खेलने उतरी उनकी टीम हार गयी.
हालांकि अनहोनी की आशंका से डरे-सहमे परिवार वालों ने बालाजी की रिहाई की ख़बर सुनकर
राहत की सांस ली.
पाकिस्तान
में बालाजी का बजा डंका
साल 2004 में
पाकिस्तान के दौरे पर गयी टीम इंडिया में बतौर मुख्य गेंदबाज शामिल किये गये
बालाजी ने अपने खेल कौशल से हर किसी का दिल जीत लिया था. उनके मैदान पर उतरते ही
दर्शक जोर-जोर से “बालाजी
जरा धीरे चलो...” गाने लगते थे.
बकौल
लक्ष्मीपति बालाजी, उन्हें पाकिस्तान दौरे पर काफी प्यार मिला, वे किसी भी पोजिशन
पर फील्डिंग करते तो दर्शकों के गाने की आवाजें उन्हें सुनायी पड़ती. पाक दौरे पर
बालाजी ने वन-डे सीरीज में टीम इंडिया की 3-2 की जीत में बड़ा योगदान दिया. टेस्ट
मैच में भी तमिलनाडु के इस स्विंग बॉलर ने अपनी लहराती गेंदों से क़हर बरपाया.
लाहौर में
सीरीज के अंतिम मैच में बालाजी फिर लोगों की निगाहों में चढ़े, जब उन्होंने
‘रावलपिंडी एक्सप्रेस’ को पारी के आखिरी ओवर में बेहतरीन छक्का जड़ा था.
बालाजी का यह शॉट इतना बेहतरीन टाइम किया गया था कि 150
किमी प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार वाली गेंद फेंकने वाले
शोएब अख्तर भी हतप्रभ रह गए थे.
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में बालाजी
की उपलब्धि
अपने 10 साल के करियर में लक्ष्मीपति बालाजी ने
कुल 8 टेस्ट मैच, 30 वन-डे और 5 टी-20 मैच खेले हैं. वे अगर चोट से प्रभावित न
होते तो उनके अंतर्राष्ट्रीय मैच और विकटों का आंकड़ा और ऊपर हो सकता था. विदित है कि टीम इंडिया के इस पूर्व क्रिकेटर ने मशहूर मॉडल
प्रिया थलूर से ब्याह रचाया है.
टेस्ट: मैच खेले 8, रन
दिए 1004, विकेट 27, सर्वश्रेष्ठ
प्रदर्शन 5/76, औसत
37.18, 4 विकेट दो बार, 5
विकेट एक बार.
वन-डे: मैच खेले 30, रन दिए 1344, विकेट 34, सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 4/48, औसत 39.52, 4 विकेट एक बार.
टी20: मैच खेले 5, रन दिए 121, विकेट 10, सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 3/19, औसत 12.10.





Nice and interesting article. Keep it up
ReplyDeletethanks
DeleteSuperb article.......
ReplyDeleteBalaji mast player tha... Uske chakke dekh k maza aa jata tha... Kam hi marta tha... Lekin maza aata hai
ReplyDeleteलाजवाब क्रिकेटर
DeleteAmazing story...
ReplyDeleteधन्यवाद
DeleteAmazing story...
ReplyDeleteArticle padha aapka .. bahut hi achcha laga rochak jankari padh kar...
ReplyDeleteशुक्रिया
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