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आशीष नेहरा को लेकर पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का बड़ा खुलासा, इनसाइड स्टोरी जान रह जाएंगे दंग





90 के दशक में मैच फिक्सिंग की स्याह दुनिया से भारतीय क्रिकेट को बाहर निकालने वाले पूर्व कप्तान सौरव गांगुली की क्रिकेट बिरादरी में एक अलग ही पहचान है. उन्होंने दृढ़निश्चय और कठिन फैसले लेकर बुरे दौर से गुजर रही टीम इंडिया की अपनी शर्तों पर काया ही पलट दी थी. भारतीय क्रिकेट पर मैच फिक्सिंग की काली छाया पड़ने के बाद प्रिंस ऑफ कोलकाता ने एक नयी टीम गठित कर वर्ल्ड क्रिकेट को ये जता दिया था कि ये टीम घर में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी शेर है. 

सौरव गांगुली ने भारतीय क्रिकेट टीम की कमान उस वक्त संभाली थी, जब मैच फिक्सिंग के बुरे दौर से गुज़र रही टीम इंडिया पर से क्रिकेट प्रशंसकों का भरोसा बिल्कुल उठ चुका था लेकिन दादा ने एक नयी टीम के आसरे दमदार खेल का मुजायरा कर क्रिकेट प्रेमियों का विश्वास फिर से बहाल कर दिया.  

सौरव गांगुली ने टीम चयन के वक्त भी काफी गंभीरता से अपने खिलाड़ियों को पिक किया. उन्होंने घरेलू क्रिकेट में दमदार और धारदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को चुना था. शुरुआती दौर में दादा ने अपने प्लेयर्स को बखूबी सपोर्ट किया, जिसका नतीजा निकला कि खिलाड़ी भी आंख मूंदकर उनपर विश्वास करते थे.


नेहरा को लेकर दादा का खुलासा

दादा की माने तो उनके दिल में दिल्ली के पूर्व तेज़ गेंदबाज आशीष नेहरा के लिए काफी इज्जत है. उन्होंने साफगोई के साथ ये बात स्वीकारी है कि इस पूर्व क्रिकेटर में दर्द सहने की भरपूर सलाहियत है. आशीष नेहरा मुश्किल दौर में भी हार नहीं मानते थे. प्रिंस ऑफ कोलकाता की माने तो 2003 वर्ल्ड कप में नीमिबिया के ख़िलाफ़ बॉलिंग करते वक्त नेहरा बुरी तरह चोटिल हो गये थे, जिसके बाद अगली सुबह उनकी एड़ी भयंकर रूप से सूज गयी थी. 

आशीष नेहरा का ये हाल देख तत्कालीन टीम इंडिया के कप्तान सौरव गांगुली चिंतित हो गये और उन्होंने इंग्लैंड के ख़िलाफ़ होने वाले अगले मैच से पूर्व तेज़ गेंदबाज की तरफ मुखातिब होते हुए कहा कि तुम्हारा तो बुरा कंडीशन है, क्या होगा? तो आशीष नेहरा ने तपाक से बोला कि कोई बात नहीं. फिर कप्तान गांगुली ने कहा कि कोई बात नहीं का क्या मतलब, तू खेलेगा या नहीं खेलेगा. फिर आशीष नेहरा ने कप्तान को जवाब देते हुए कहा कि नहीं..नहीं..खेलूंगा. फिर गांगुली ने कहा कि खेलेगा तो ठीक है लेकिन तू बॉलिंग मेरे पेस पर करेगा या फिर अपने पेस पर. इतना सुनने के बाद बेफिक्र आशीष नेहरा ने जवाब दिया कि आप चिंता न करो, सिर्फ फिजियो को बोलो कि वो मेरे साथ रहे. इतना सुनने के बाद गांगुली हैरान हो गये और फिर फिजियो को आशीष नेहरा का पूरा ख्याल रखने की हिदायत दी.


इंग्लैंड के ख़िलाफ़ नेहरा ने रचा इतिहास

इस घटना के बाद सौरव गांगुली की माने तो इंग्लैंड के ख़िलाफ़ अहम मैच में चोटिल होने के बावजूद भी नेहरा ने 150 किमी प्रति घंटा की स्पीड से बॉलिंग की और अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिये. बॉलिंग रन-अप के दौरान उल्टियां भी करते रहे लेकिन टीम की खातिर उन्होंने खुद के जज्बे को झुकने नहीं दिया और फिर 26 फरवरी 2003 को डरबन में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ टीम इंडिया के पूर्व तेज़ गेंदबाज आशीष नेहरा ने इतिहास लिख दिया और करियर की बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए 23 रन देकर 6 विकेट झटक लिये.

आशीष नेहरा के इस दमदार प्रदर्शन के बाद सौरव गांगुली के मन में इस तेज़ गेंदबाज के लिए काफी इज्जत बढ़ गयी. बकौल गांगुली वे बायें हाथ के चुनिंदा गेंदबाजों में बेहतरीन पेसर थे.


प्रिंस ऑफ कोलकाता का एक और खुलासा

सौरव गांगुली ने आशीष नेहरा के बारे में एक और खुलासा करते हुए कहा है कि जब भी मैं दिल्ली के इस तेज़ गेंदबाज को प्लेइंग 11 से ड्रॉप करता था तो मेरे लिए सिरदर्द बढ़ जाता था क्योंकि मुझे पता होता था कि ड्रॉप करने के बाद नेहरा सीधे मेरे कमरे में आएगा और फिर मेरी बातों को सुने बग़ैर लगातार अपनी बातें बोलता जाएगा. 

दादा के मुताबिक आशीष नेहरा के मेरे कमरे में घुसने से पहले ही वेटर से दो कप कॉफी रूम में मंगा लेता था ताकि उसके आने के बाद उसे रिलैक्स कर सकूं.
प्रिंस ऑफ कोलकाता की माने तो कमरे में घुसते ही आशीष नेहरा का पहला सवाल होता था कि मुझे बताओ मैं क्यूं नहीं खेला? प्लेइंग इलेवन से क्यों ड्रॉप किया गया? मैं इस वक्त अच्छी गेंदबाजी कर रहा हूं. 150 किमी प्रति घंटे की स्पीड से बॉलिंग कर रहा हूं. मेरी लाइन-लेंथ सही है. मेरी गेंदें अंदर और बाहर दोनों तरफ स्विंग हो रही है, फिर मुझे क्यों ड्रॉप किया गया? इतना सुनने के बाद गांगुली उन्हें शांत करते और फिर कॉफी पीने के लिए बोलते और वादा करते कि अगले मैच में मैं तूझे जरूर मौका दूंगा.

सौरव गांगुली के मुताबिक इस तरह के प्लेयर्स मुझे काफी पसंद थे, जो हरवक्त अपना सौ फीसदी देने के लिए तत्पर रहते थे. उन्हें पता था कि ऐसे ही खिलाड़ी मैच में जीत दिला सकते हैं लिहाजा मैंने ऐसे प्लेयर्स पर भरोसा किया और उन्हें भरपूर मौका दिया.      
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