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सारे सिग्नल तोड़ ये तूफ़ानी तेज़ गेंदबाज कैसे बना “रावलपिंडी एक्सप्रेस”? जानिए दिलचस्प कहानी



दनदनाती गेंदों से बल्लेबाजों में हड़कंप मचाने वाले पाकिस्तान के तूफ़ानी बॉलर शोएब अख्तर का मिजाज ठेठ तेज़ गेंदबाज की तरह है। वॉकिंग स्टाइल और हावभाव से ही उनका कांफिडेंस झलकता है और यही आत्मविश्वास उन्हें आला दर्जे का तेज़ गेंदबाज बनाता है। 

क्रिकेट के मैदान पर विरोधियों को चारो खाने चित्त करने वाले शोएब अख्तर को कोई टाइगर बुलाता है तो कुछ रावलपिंडी एक्सप्रेस लेकिन क्या आपको पता है कि शोएब अख्तर का निकनेम रावलपिंडी एक्सप्रेस कब, कैसे और किसने रखा। इसके पीछे भी एक दिलचस्प किस्सा जुड़ा हुआ है। 


वर्ल्ड क्रिकेट में छाने को बेताब शोएब अख्तर

साल 1999 वर्ल्ड कप की बात है, जब सारी दुनिया में फास्ट बॉलिंग के नाम पर दक्षिण अफ्रीका की व्हाइट लाइटनिंग यानी सफेद बिजली के नाम से मशहूर तेज गेंदबाज एलन डोनाल्ड की चर्चा होती थी। विश्व की सारी टीमों में उनके प्रति दहशत था लेकिन पाकिस्तान के इस नौजवान तेज गेंदबाज में गज़ब का आत्मविश्वास था कि वो भी फास्ट बॉलिंग की एक नयी परिभाषा गढ़ सकता है।


रावलपिंडी एक्सप्रेस कैसे पड़ा निकनेम

1999 वर्ल्ड कप में ब्रिस्टल में खेले गये पहले मैच से ही शोएब ने गज़ब का रिदम पकड़ा। उनकी पहली गेंद ने वेस्टइंडीज के बल्लेबाज कैंपबेल को हतप्रभ कर दिया। बंदूक से निकली गोली की भांति गेंद की रफ्तार इतनी तेज़ थी कि कैंपबेल को कुछ सूझा नहीं और बल्ले का बाहरी किनारा लेते हुए गेंद विकेटकीपर के ऊपर से स्टेडियम के बाहर चली गयी।

गेंद की गति को देख बैट्समैन कैंपबेल घबड़ाए हुए थे, तभी शोएब ने बल्लेबाज की तरफ मुखातिब होते हुए कहा कि दोस्त, तुम बहुत बड़ी समस्या से घिर गये हो।

विश्व कप के दौरान खेले गये सभी मैचों में शोएब अख्तर की गेंद की रफ्तार क्रिकेट बिरादरी में चर्चा का केंद्रबिंदु बन गयी थी। उनकी गेंदें 97, 98, 99 मील प्रति घंटा की स्पीड से बल्लेबाजों में दहशत पैदा कर रही थी, तभी बिजली सी कौंधती तेज गेंदों को देख कमेंटेटर टोनी ग्रेग ने उनके होम टाउन रावलपिंडी के नाम पर रावलपिंडी एक्सप्रेस निकनेम दिया।


प्रशंसकों की जुबां पर एक ही नाम – रावलपिंडी एक्सप्रेस

इंग्लैंड में खेले गये 1999 विश्व कप से पूर्व शोएब अख्तर अपनी उम्दा गेंदबाजी से विश्व क्रिकेट पर छाए हुए थे। वर्ल्ड कप से पहले शारजाह में तीन देशों के मध्य खेले गये कोकाकोला कप के दौरान कुल 11 विकेट लेकर तहलका मचा रखा था।

इस टूर्नामेंट में वे मैन ऑफ द सीरीज भी थे लिहाजा वे अपनी बेहतर फिटनेस और फॉर्म लेकर वर्ल्ड कप के लिए इंग्लैंड पहुंचे थे।


इंग्लैंड पहुंचने पर शोएब ने साथी खिलाड़ियों से कहा कि वे इस विश्व कप में छा जाएंगे और तूफ़ानी गेंदबाजी की वजह से प्रशंसक याद करेंगे। 

शोएब के इस बयान के बाद साथियों ने मजाक भी उड़ाया लेकिन टूर्नामेंट जैसे-जैसे बढ़ता गया, वैसे ही शोएब नाम का एक नया चमकता सितारा उभरा। अब पूरी दुनिया उनकी खौफ़नाक तेज गेंदबाजी की वजह से रावलपिंडी एक्सप्रेस के तौर पर पहचानने लगी थी। 
  
वाकई में इस नामकरण के बाद रावलपिंडी एक्सप्रेस पूरी दुनिया में क्रिकेट के मैदान पर सारे सिग्नल तोड़ धड़ल्ले से दौड़ती रही और रिकॉर्डबुक में नये-नये रिकॉर्ड दर्ज कराती रही।   

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10 comments:

  1. बहुत अच्छा आलेख, हर बैट्समैन दहशत में रहता था एक्सप्रेस की स्पीड से

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  2. बहुत ही शानदार जानकारी दी है आप ने

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  3. Keep it up. Keep giving such informations.

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