“टीम
इंडिया की दीवार” रहे राहुल शरद द्रविड़ वाकई में जीनियस है।
विरोधी गेंदबाजों के दिलोदिमाग पर काल बनकर छाने वाले राहुल बल्लेबाजी के दौरान
जितने सख्त दिखते हैं, आम जिंदगी में वे उतने ही शांत, सरल और संयमित हैं, तभी तो मुश्किल
हालात से गुजरने के बावजूद भी शांतचित्त रहने वाले द्रविड़ को “मिस्टर कूल” के नाम से जाना जाता है। ये व्यक्तित्व उन्हें
दूसरे खिलाड़ियों से अलहदा बनाता है। यही उनका प्लस प्वाइंट भी है।
कई मर्तबा मुश्किल
हालातों से जूझने के बाद वे अपने आचरण और व्यवहार से पार पा लेते हैं। ऐसा ही कुछ
हुआ था साल 1996 में, जब राहुल द्रविड़ की टीम इंडिया में एंट्री भी नहीं हुई थी।
दर्शकों की बदतमीजी पर भी कूल रहे मि. कूल
क्रिकेट
के मैदान पर गेंदबाजों पर टूट पड़ने वाले राहुल द्रविड़ ग्राउंड के बाहर कितने कूल
रहते हैं, इसका उदाहरण देखने को मिला साल 1996 में, जब बेंगलुरु के आर.एस.आई.
मैदान पर कर्नाटक और बड़ौदा के बीच मैच हो रहा था। ये मैदान मिलिट्री का ग्राउंड था,
इसके बावजूद यहां खिलाड़ियों की सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं था। कोई भी दर्शक
खिलाड़ियों के पास आराम से जा सकता था।
दोपहर के
वक्त लंच ब्रेक के दौरान राहुल द्रविड़ और उनके साथी खिलाड़ी फजल खलील आराम कर रहे
थे, तभी कुछ दर्शक राहुल के पास धमके और गालियां देने लगे। वे राहुल की बल्लेबाजी
के बारे में बातें कर रहे थे।
फजल खलील
के मुताबिक वे राहुल पर व्यंग्य कसने लगे और गालियां
देने लगे। इस दौरान राहुल ने एक शब्द नहीं बोला। मुझे गुस्सा आ रहा था और मैं उनको
पीटने के लिए उठा लेकिन द्रविड़ ने मुझे बैठने का इशारा किया और कहा कि मुझसे बाद
में बात करेगा।
जब वे
दर्शक बहुत कुछ कह चुके और राहुल की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला तो वे अपने आप चले
गये। उसके बाद मैदान में सुरक्षा बढ़ा दी गयी।
दर्शकों की प्रतिक्रिया को सलाम
दर्शकों की घिनौनी
हरक़त के बावजूद भी राहुल द्रविड़ का शांत व्यवहार काफी हैरान कर देने वाला था।
दर्शकों के जाने के बाद मिस्टर कूल ने साथी खिलाड़ी फज़ल खलील से मुखातिब होते हुए
कहा कि मैं उनकी राय जानना चाहता था। अब मैं उनकी
राय जान गया हूं।
इनमें
से कुछ बातें सही भी हैं और मैं इसे सकारात्मक लेता हूं। ये मेरे लिए गालियां नहीं
हैं। मुझे कुछ क्षेत्रों में अपने आप में विकास करना होगा।
आलोचकों
को बल्ले से राहुल का जवाब
इस वाकये के बाद
राहुल ने दोगुने जोश और जज्बे के साथ मेहनत की, जिसका परिणाम आने वाले दिनों में
देखने को मिला, जब कर्नाटक की टीम सेमीफाइनल में द्रविड़ की 153 रनों की पारी की
बदौलत हैदराबाद को आसानी से पटखनी दे दी।
तमिलनाडु के ख़िलाफ़ भी फाइनल मैच में “रॉक ऑफ जिब्राल्टर” ने एक
और शतक लगाया और आलोचकों को क़रारा जवाब दिया।
द्रविड़ के इस
शानदार प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं की आंखें खोल दी और फिर राहुल की क्षमता को परखते
हुए इंग्लैंड दौरे के लिए टीम इंडिया में शामिल कर लिया गया, जहां से इस जीनियस ने अपने बेहतरीन करियर की शुरुआत की और वर्ल्ड क्रिकेट पर पूरी तरह से छा गया।




Great players, great story...
ReplyDeleteGreat players, great story...
ReplyDeleteGood to know some hidden talent of Dravid, thanks for sharing this.
ReplyDeletethanks sir
DeleteBahoot badiya bhai
ReplyDeleteThanks bhai
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