मैच
फिक्सिंग की स्याह दुनिया से बाहर निकलने के बाद भारतीय क्रिकेट में एक ऐसा भी दौर
आया था, जिसने खिलाड़ियों के अंदर असुरक्षा की भावना पैदा कर दी थी और वो दौर था
कोच ग्रेग चैपल का. भारतीय क्रिकेट को पूरी तरह कंट्रोल करने की फिराक में लगे ग्रेग
चैपल ने कई चालें चली थी. उनमें से एक थी टीम इंडिया के वरिष्ठ खिलाड़ियों को टीम
से बाहर का रास्ता दिखाकर एकक्षत्र राज करना. चैपल की इस चाल से प्लेयर्स में
मतभेद के साथ-साथ मनभेद भी शुरू हो गये थे. हर कोई इस बुरे दौर से बाहर निकलना
चाहता था लेकिन दलदल में फंसे होने की वजह से कुछ सूझ नहीं रहा था. सचिन तेंदुलकर
जैसा महान बल्लेबाज भी इससे अछूता नहीं था.
वक्त से पहले संन्यास की सोच
क्रिकेट
से बेपनाह मोहब्बत करने के बावजूद भी मास्टर-ब्लास्टर ने साल 2007 में हुए वर्ल्ड
कप के बाद संन्यास लेने का फैसला कर लिया था. ये वो दौर था, जब भारतीय क्रिकेट में
उथल-पुथल मचा हुआ था. वेस्टइंडीज में हुए विश्वकप में टीम इंडिया की काफी दुर्गति
हुई थी. बांग्लादेश जैसे पुछल्ले टीमों से क़रारी हार का सामना करना पड़ा था. टीम
इंडिया के ड्रेसिंग रूम का माहौल बिगड़ चुका था. ऐसे में तेंदुलकर ने “एंडुलकर” का अहम फैसला ले लिया लेकिन एक फोन कॉल ने उनके निर्णय को प्रभावित किया
और सचिन ने अपना फैसला बदल दिया.
विव रिचर्ड्स के फोन कॉल ने बदला फैसला
सचिन
तेंदुलकर के मुताबिक 2007 वर्ल्ड कप के बाद उनकी मनोदशा काफी ख़राब हो गयी थी. वे
क्रिकेट का लुत्फ नहीं उठा रहे थे और रिटायर होने की सोचने लगे थे. तभी उन्हें
दिग्गज क्रिकेटर और बचपन के हीरो विव रिचर्ड्स का कॉल आया और उनसे उत्साहवर्द्धक
शब्द सुनने को मिले. विव रिचर्ड्स ने अचानक से उन्हें वेस्टइंडीज से कॉल किया था
और तक़रीबन पौन घंटे तक मास्टर-ब्लास्टर से बात की. उन्होंने सचिन को आश्वस्त किया
कि उनके अंदर अभी काफी क्रिकेट बाकी है और इस बात पर जोर दिया कि मुझे क्रिकेट
छोड़ने के बारे में सोचना नहीं चाहिए.
कैरेबियाई
दिग्गज विव रिचर्ड्स के प्रोत्साहन के बाद सचिन तेंदुलकर ने संन्यास का फैसला बदल
दिया. सचिन की माने तो विव रिचर्ड्स बचपन से उनके हीरो रहे हैं. वे उनका और
उनके विचारों का सम्मान करते हैं इसलिए जब उन्होंने फोन करने और खेलना जारी रखने
के लिए मनाने में इतना सारा वक्त बिताया तो इसका सचिन के लिए काफी महत्व था.
मास्टर-ब्लास्टर के मुताबिक रिचर्ड्स ने ताउम्र छोटे भाई की तरह उन्हें प्यार दिया
है और मुश्किल घड़ी में हरवक्त मार्गदर्शन किया है।
आलोचकों को मिला क़रारा जवाब
विव
रिचर्ड्स से मिली अहम हिदायत के बाद मास्टर-ब्लास्टर ने अपने बल्ले से एकबार फिर
जौहर दिखाना शुरू किया और ख़राब फॉर्म से उबरते हुए वर्ल्ड क्रिकेट में एकबार फिर
धूम मचा दी. साल 2007 की ख़राब फॉर्म से बाहर निकलते हुए साल 2008 की शुरुआत में
सचिन पूरे रंग में आ चुके थे. इसकी बानगी देखने को मिली ऑस्ट्रेलिया टूर पर, जहां
इस महान खिलाड़ी ने आलोचनाओं को दरकिनार करते हुए सिडनी में जबरदस्त शतक जड़ दिया.
सैकड़ा
जड़ने के बाद एकबार फिर लिटिल चैंपियन को अपने हीरो विव रिचर्ड्स की याद आयी और
उन्होंने फौरन फोन करके विव के अत्यंत महत्वपूर्ण समर्थन के लिए शुक्रिया कहा. सचिन
ने इस सैकड़े के बाद फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक कीर्तिमान रचते
हुए आलोचकों को क़रारा जवाब दिया.
फैसला बदलने के बाद मिली कामयाबी
विव
रिचर्ड्स की हौसलाफजाई के बाद सचिन तेंदुलकर ने कई कामयाबियां हासिल की. मसलन..
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भारत के साथ साल 2009 में वे विश्व टेस्ट रैंकिंग में शिखर पर पहुंचे.
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साल 2012 में सचिन तेंदुलकर ने 100वां अंतर्राष्ट्रीय शतक पूरा किया.
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36 साल की उम्र में एकदिवसीय मैच में दोहरा शतक लगाने वाले पहले
खिलाड़ी बने.
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रांची के राजकुमार महेन्द्र सिंह धोनी की अगुवाई में साल 2011 में
विश्व कप जीता, जो हर क्रिकेटर का एक सपना होता है.
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साल 2013 में मुंबई के घरेलू मैदान वानखेड़े स्टेडियम में अपना 200वां
और आखिरी टेस्ट मैच खेलकर क्रिकेट से संन्यास लिया.




Ok
ReplyDeleteReally the real hero is rechards..who had encouraged d GOD OF CRICKET to take bat again....👏
ReplyDeletesprbbb article👏
ReplyDeleteSir vivian richards......
ReplyDeleteWo khud me ek cricket hai
ReplyDeleteViv richard gave valuable advice to sachin. Hats off to Viv richard. Shandar aalekh
ReplyDeleteVery nice article
ReplyDeletethanks
DeleteMust say ....viv rechard gave advice on rite time.......beautifully described 👍🏻
ReplyDeleteThanks vatsayani
DeleteThat show sachin was only a player not a god...
ReplyDeleteEven he frustrate and need proper counselling and mentoring... Viv had done that