क्रिकेट के महान
बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर अपनी बल्लेबाजी को बेहद प्रभावशाली बनाने के लिए कई जतन
करते थे। वे गेंदबाजों की धार को कुंद करने के लिए कभी लेग स्टंप से बाहर खड़े
होते तो कभी कवर ड्राइव से दूरी बनाने के लिए खुद पर पाबंदी लगा देते थे। वे सारे
उपाय अपनी बल्लेबाजी को दुरुस्त करने के लिए करते थे लेकिन एक मजेदार किस्सा है,
जिससे लगभग हर कोई अनभिज्ञ होगा। जी हां, बात 2003 वर्ल्ड कप की है, जब
मास्टर-ब्लास्टर की तबीयत एक महत्वपूर्ण मैच से पूर्व नासाज़ हो गयी लेकिन मैच
खेलने पर अड़े सचिन तेंदुलकर ने एक नयी तरकीब निकाली और मैच में शानदार पारी खेली।
लूज मोशन से बेहाल हुए थे सचिन
दरअसल, साल 2003 वर्ल्ड
कप में श्रीलंका के ख़िलाफ़ होने वाले अहम मैच से पूर्व की शाम मास्टर-ब्लास्टर का
पेट ख़राब हो गया था और शरीर में पानी की कमी होने लगी थी। ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि
पाकिस्तान के ख़िलाफ़ महत्वपूर्ण मैच खेलते वक्त सचिन के पेट में ऐंठन हो रही थी,
जिसकी वजह से लिटिल चैंपियन ने बहुत सारे आइसोटॉनिक पेय का सेवन किया था। यही
नहीं, एनर्जी ड्रिंक में भी एक चम्मच नमक डालकर पी लिया था और सोचा था कि पेट की
ऐंठन ठीक हो जाएगी लेकिन दांव उल्टा पड़ गया और पेट अधिक ख़राब हो गया। ऐसे में
श्रीलंका के ख़िलाफ़ होने वाले मैच में सचिन खेलने पर अड़े थे लिहाजा उन्होंने एक
नयी तरकीब निकाली, जो काफी हद तक सफल रही।
..जब टिश्यू
पेपर लगाकर की थी बल्लेबाजी
मास्टर-ब्लास्टर
सचिन तेंदुलकर की माने तो श्रीलंका के ख़िलाफ़ बल्लेबाजी करते वक्त स्थिति बेहद
ख़राब हो गयी लिहाजा उन्हें अंडरवियर के अंदर टिश्यू पेपर लगाकर बैटिंग की। बकौल
सचिन, उन्हें ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान ड्रेसिंग रूम में भी जाना पड़ा। वे मैदान
में बेहद बेचैनी महसूस कर रहे थे। सचिन के मुताबिक पेट में मरोड़ के साथ बल्लेबाजी
करना सुखद अनुभव नहीं था। मैच के दौरान वे पेट दर्द को लगातार सहते रहे लेकिन खुशी
की बात ये रही कि उनकी कोशिश रंग लायी और उन्होंने शानदार 97 रनों की अहम पारी
खेलते हुए टीम को सेमीफाइनल में प्रवेश दिला दिया।
इस मैच के बाद सेमीफाइनल
में टीम इंडिया की अगली भिड़ंत कीनिया से हुई, जिसने टूर्नामेंट के दौरान कुछ
शीर्ष क्रम की टीमों को हराकर सनसनी फैला दी थी लेकिन सेमीफाइनल में टीम इंडिया के
सामने उसकी एक न चली और भारतीय टीम ने सौरव गांगुली और सचिन तेंदुलकर की शानदार
साझेदारी की बदौलत आसानी से कीनिया को पटखनी देते हुए फ़ाइनल की सीट पक्की कर ली।
हालांकि फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने सौरव गांगुली की अगुवाई वाली टीम इंडिया को मात
देते हुए वर्ल्ड कप पर कब्जा जमा लिया था।




सचिन की दृढ़इच्छाशक्ति बताती है कि उन्हें क्रिकेट से कितना प्यार है.
ReplyDeleteinspirational story
ReplyDeleteYe under ki baat hai.
ReplyDeleteNice story ...
ReplyDeletePet ka bhukamp sachin k liye lucky sabit hua semifinal me team ko pahuchaya.
ReplyDeletewow..great and interesting story
ReplyDeleteVery strong willpower.....inspiring article
ReplyDeleteदृढता ही सफलता दिलाती है
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